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India@2047 Conference & भारत के महारथी सम्मान के 4th Edition
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calendar_today Feb 13, 2026

India@2047 Conference & भारत के महारथी सम्मान के 4th Edition

30 नवंबर 2025 — नई दिल्ली के प्रतिष्ठित NDMC Convention Centre में आयोजित India@2047 Conference & भारत के महारथी सम्मान के 4th Edition को सफलतापूर्वक संपन्न होते देखना मेरे लिए गर्व और सम्मान का क्षण रहा।इस आयोजन के Organising Team का हिस्सा बनकर, देशभर से आए 700+ उद्यमी, निवेशक, इनोवेटर्स, शोधकर्ता और पॉलिसी मेकर्स को एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर जोड़ना वाकई एक ऐतिहासिक कदम था। 13 घंटे तक चले इस भव्य कार्यक्रम में 30 से अधिक राष्ट्रीय स्तर के वक्ताओं ने Viksit Bharat @ 2047 के विज़न पर अपने विचार, अनुभव and योगदान साझा किए।कार्यक्रम के दौरान न सिर्फ पैनल डिस्कशन और नॉलेज सेशंस हुए, बल्कि B2B और B2G कनेक्ट के ज़रिये वास्तविक बिजनेस अवसर भी बने। Exhibitions, Launches, Networking — हर सेक्शन का उद्देश्य था कौशल, उद्यमिता और तकनीक को साथ लेकर भारत के विकास को तेज करना।IBSEA के मिशन “जिन्होंने बढ़ाया देश का मान — हर साल हम करते हैं 50 महारथियों का सम्मान” को आगे बढ़ाते हुए, इस वर्ष 50 और प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को “भारत के महारथी सम्मान” से सम्मानित किया गया — और अब यह संख्या 200 हो चुकी है।बिहार से आकर, मैं हमेशा मानता हूँ — छोटे शहरों के बड़े सपने ही भारत को विकसित बनाएंगे स्टार्टअप इकोसिस्टम, डिजिटल ग्रोथ और AI स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देकर Vocal for Local से Local to Global की दिशा में अपना योगदान देने का सौभाग्य मुझे मिल रहा है इस सफल आयोजन के लिए अपनी पूरी टीम, सहयोगी संगठनों, स्टेट लीडर्स और सभी समर्थकों का दिल से आभार
3rd Mega Award Function Panchkula
News
calendar_today Feb 13, 2026

3rd Mega Award Function Panchkula

1 फरवरी को पंचकुला–चंडीगढ़ स्थित पल्लवी ग्रैंड होटल में ज्योतिष ज्ञान संस्था ( अंकिता राजीव शर्मा जी ) द्वारा आईबीएसईए के सहयोग से एक भव्य मेगा अवॉर्ड फंक्शन का आयोजन किया गया। इस गरिमामय कार्यक्रम में लगभग 100 सनातनी विद्वानों और साधकों ने सहभागिता की और इस विषय पर सार्थक संवाद हुआ कि कैसे ज्योतिष एवं विविध आध्यात्मिक विद्याओं के माध्यम से भारत पुनः विश्व गुरु बनने की दिशा में अग्रसर हो सकता है।मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में मैंने साझा किया कि हमारी संस्कृति हमें “अहं ब्रह्मास्मि” का जो अर्थ सिखाती है, वह यह नहीं कि “मैं श्रेष्ठ हूँ”, बल्कि यह कि “मैं भी उसी परम चेतना का अंश हूँ।” याद रखिए — “मैं श्रेष्ठ हूँ” आत्मविश्वास है, लेकिन “मैं ही श्रेष्ठ हूँ” अहंकार है। भारत की परंपरा हमेशा जोड़ने वाली रही है, तोड़ने वाली नहीं। हम वसुधैव कुटुम्बकम में विश्वास करते हैं — पूरी दुनिया एक परिवार है। हम गाय को माता कहते हैं, वृक्षों की पूजा करते हैं, और मानते हैं कि कण-कण में ईश्वर है। हमारे हर पर्व का एक गहन उद्देश्य है।अपने वक्तव्य में मैंने 2025 के प्रयागराज महाकुंभ का भी उल्लेख किया, जहाँ 45 दिनों में लगभग 66 करोड़ श्रद्धालुओं की सहभागिता हुई — यह विश्व का सबसे बड़ा मानव समागम बना। यह केवल आस्था नहीं थी, यह भारत की चेतना का उत्सव था। इस विराट उपस्थिति ने एक बार फिर सिद्ध किया कि भारत आज भी अपनी संस्कृति और मूल्यों से गहराई से जुड़ा हुआ है। हमारे शास्त्र कहते हैं — “यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत,” अर्थात जब-जब समाज मार्ग से भटकता है, तब-तब धर्म स्वयं मार्ग दिखाने आता है — और तब आप जैसे लोग सामने आते हैं, युवाओं का उत्थान करते हैं और संस्कृति का पुनर्जागरण करते हैं।मैंने यह भी रेखांकित किया कि आज आध्यात्मिकता केवल मंदिरों तक सीमित नहीं है। हम एक ऐसे युग में हैं जहाँ मोबाइल ऐप्स, एआई, डिजिटल प्लेटफॉर्म और टेक्नोलॉजी के माध्यम से आध्यात्म हर युवा तक पहुँच रहा है। Gen Z की भागीदारी तेज़ी से बढ़ रही है। आज फेथ-टेक इंडस्ट्री का वैश्विक मार्केट साइज लगभग 65 बिलियन डॉलर, यानी करीब 5 लाख करोड़ रुपये है। कई स्टार्टअप्स ने उल्लेखनीय फंडिंग जुटाई है और ई-पूजा, ई-प्रसाद तथा अन्य डिजिटल संसाधनों के माध्यम से हर घर तक सेवाएँ पहुँचा रहे हैं। भारत में इस समय 900 से अधिक स्पिरिचुअल टेक स्टार्टअप्स सक्रिय हैं, और कोविड के बाद डिजिटल आध्यात्मिक सेवाओं की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।हालाँकि मैंने एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाया — क्या आध्यात्म केवल बिजनेस है? मेरा उत्तर स्पष्ट था: नहीं। आध्यात्म सिर्फ बिजनेस नहीं है; आध्यात्म भारत की आत्मा है। इसी भाव को मैंने इस श्लोक के माध्यम से व्यक्त किया —“अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥”अपने संबोधन का समापन मैंने अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रेरणादायी पंक्तियोंभारत जमीन का टुकड़ा नहीं, जीता जागता राष्ट्रपुरुष है.यह चन्दन की भूमि है, अभिनन्दन की भूमि है, यह तर्पण की भूमि है, यह अर्पण की भूमि है. इसका कंकर-कंकर शंकर है, इसका बिन्दु-बिन्दु गंगाजल है. हम जिएंगे तो इसके लिए और शाम से मारेंगे भी तो इसके लिए ।से किया और यह भी साझा किया कि मेरा संगठन 21वीं सदी के विकसित भारत के निर्माण हेतु 21 अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है, जिनमें होलिस्टिक हेल्थकेयर एक अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। मैंने यह भी बताया कि आईबीएससी का “व्यापार बढ़ाओ एलायंस” आध्यात्मिक हीलर्स को उनके कार्य का विस्तार करने और उन्हें टेक्नोलॉजी से जोड़ने में कैसे सहयोग कर सकता है।
Why AI Startup Edge Is the Growth Partner for Modern Startups
News
calendar_today Feb 12, 2026

Why AI Startup Edge Is the Growth Partner for Modern Startups

Modern startups face a new reality. Competition is intense, customer expectations are high, and resources are limited. Founders are expected to move fast, make smart decisions, reduce costs, and scale operations at the same time. Traditional growth methods such as hiring more people or increasing ad spend are no longer enough. Startups need intelligent systems that help them grow without creating chaos.This is where AI Startup Edge becomes a true growth partner. It helps startups use artificial intelligence in a structured and practical way. Instead of adding complexity, it simplifies operations, improves decision-making, and builds scalable systems. AI Startup Edge focuses on measurable business results, not just technology implementation.Modern startups that embrace AI early gain clarity, efficiency, and competitive advantage. This blog explains why AI Startup Edge is the right growth partner for modern startups and how it helps businesses grow smarter, faster, and more sustainably.The Challenges Modern Startups FaceBefore understanding the solution, it is important to understand the problems startups experience today.Modern startups struggle with multiple pressures.Limited Teams and ResourcesMost startups operate with small teams. Founders often manage multiple roles at once. Hiring too quickly increases expenses, but not hiring limits growth. This creates constant tension.Operational Overload